अनदेखे सहारे
अनदेखे सहारे
अनदेखी फ़ौजें तुम्हारे शरीर में लड़ती हैं, तुम्हें ज़िंदा रखती हैं,
उन्हीं के सहारे से, तुम चलते रहते हो, संसार बनाते हो।
तुम बेटी का टिफ़िन तैयार करते हो, माँ को दरवाज़े तक छोड़ते हो,
काम पर पहुँचते हो, दोस्तों के फ़ोन कॉल का जवाब देते हो।
पर यदि तुम सेहत को अनदेखा करो और गिर पड़ो — दुनिया बदल जाएगी:
तुम्हारी बेटी उस खाने का इंतज़ार करती रहेगी जो अब कभी नहीं आएगा।
तुम्हारी बूढ़ी माँ लड़खड़ाती रहेगी, पर उसे थामने को कोई बाँह नहीं बढ़ाएगा।
दोस्त कई बार कॉल करते रहेंगे, पर कोई जवाब नहीं देने आएगा।
अनदेखे अनगिनत लोगों के सहारे से, तुम बने हो अपनों का सहारा।
ज्यों ही तुम गिरोगे, गिर जाएगा सारा का सारा संसार तुम्हारा।
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लोक-शैली · स्त्री-पुरुष युगल स्वर
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— Ramesh Jain