चेहरा तुम्हारा, तमाशा उनका
चेहरा तुम्हारा, तमाशा उनका
निवाला मुँह में जाने से पहले तुम उसकी photo लेते हो,
तुम चुनते हो कौन सा दिन best था, कौन सा angle सही, और कैसी light थी।
तुम वो caption लिखते हो जो दुनिया को समझाए कि तुम असल में कौन हो,
फिर likes की गिनती तय करती है, तुम सही थे या नहीं।
जो चेहरा तुम post में पहनते हो, वो वो चेहरा नहीं जिसे लेकर तुम पैदा हुए थे,
इस दिखावे के ‘show’ में जो घंटे तुम फूँक रहे हो… वो सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारे अपने घंटे थे।
जो अनजान लोग तुम्हारी तस्वीर like करते हैं, वो तुम्हारे सूने कमरे को नहीं जानते,
और वो कमरा जहाँ तुम वाक़ई साँस लेते हो… अफ़सोस, तुम अब खुद उसमें मौजूद नहीं रहते!
जो चेहरा तुम दिखाते रहे, अब बस वही एक चेहरा बचा है,
असली का यहाँ पता नहीं, जो दिखता है वो माया का तमाशा है!
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— Ramesh Jain