ज़िंदगी के कारीगर
ज़िंदगी के कारीगर
एक ही ज़िंदगी मिली है — इसे भरपूर जियो।
खुलकर घूमो, गुनगुनाओ, उत्सवों में नाचो-गाओ,
मन लगाकर काम करो, उत्साह से खेलो,
अस्सी की उम्र में अठारह की तरह रहो।
रुको नहीं, चलते रहो, जीते रहो — हर बरस बल बढ़ाओ।
वही खाना चुनो जो मन को भाए, और तन को मज़बूत बनाए।
उन्हीं को पास रखो जो हौसला दें, उत्साहित करें,
आज चैन से सोओ, सुबह तैयार उठो — हर दिन नया दिन बनाओ।
सेहत की शक्ति से, अपना जीवन बनाना है।
उसे रोज़ बढ़ाकर, अपना जीवन सजाना है।
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लोक-शैली · स्त्री-पुरुष युगल स्वर
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— Ramesh Jain