अनसुनी चेतावनी
अनसुनी चेतावनी
तुम्हारा शरीर ही सचमुच तुम्हारा है,
एक घर जिसे तुम छोड़ नहीं सकते।
थकान, दर्द, उथली साँस को तुम टाल देते हो,
कहते हो यह तो सामान्य है, चले जाएँगे।
जो आज फुसफुसाता है, कल चीख बनकर गूँजेगा।
जिसे तुम अनदेखा करते हो, वही तुम्हारी त्रासदी बनेगा।
ज़रा-सी सावधानी इसे रोक सकती है,
वरना यही समस्या जीवन भर बढ़ती रहेगी।
बीमारी में दवाएँ-दुआएँ, तंदुरुस्ती में टाल-मटोल।
रहो तंदुरुस्ती में सावधान, कभी न दोगे बीमारी का मोल।
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लोक-शैली · स्त्री-पुरुष युगल स्वर
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— Ramesh Jain