असली दौलत
असली दौलत
सेहत है असली दौलत, तुम अनजाने में खर्च करते जाते हो,
वह सिक्का जो हमेशा जेब में है, पर जिसे तुम भूल जाते हो।
तुम गिनते हो अपना सोना, अपनी ज़मीन, अपना सब कुछ,
पर अपनी सेहत की सच्ची कीमत कैसे भूल जाते हो?
अमीर बीमार का सोना उसकी चाय भी मीठी नहीं कर पाएगा।
सेहतमंद ग़रीब मुफ़्त में अपने बाग़ का सुख पाता रहेगा।
भिखारी नाचता है, पर अमीर खड़ा तक नहीं हो पाता।
सेहत का मोल तभी जान पाते हो, जब हाथ से निकल जाती है।
सेहत बनाती है तन और मन, जो हैं जीवन का धन।
बढ़ाओ तन और मन का धन, खिल उठेगा जीवन।
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लोक-शैली · स्त्री-पुरुष युगल स्वर
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— Ramesh Jain