Health as Life

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सुनहरे बरस जियो

सुनहरे बरस जियो

सुनहरे बरस जियो

पचहत्तर की उम्र में, दुनिया के शिखर पर खड़े हो तुम,
शरीर में है जान, दिमाग़ है रोशन, और बचत भी भरपूर है।
ज़िंदगी का काम है पीछे, और पूरी ज़िंदगी आगे है,
जो पसंद हो वो करो, तुम्हें नई शुरुआत की आज़ादी है!

इसी दिन के लिए की सालों मेहनत, और सबकुछ ख़ूब बनाया है,
ज़िम्मेदारियाँ पीछे छूटीं, अपनों का साथ पाया है।
सारे फ़र्ज़ पूरे किए, अब ये क्राउनिंग इयर्स जीने की बारी है,
सूरज बुलंद है, सारा दिन अपना है, हर लम्हा सुनहरा है!

जिसकी तैयारी सालों की, अब उस सुनहरे महल में बसो,
ज़िंदगी के इस दौर में, ख़ूब मौज करो और जियो!

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ग़ज़ल · एकल पुरुष स्वर

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— Ramesh Jain