ढलती धूप
भरपूर बुढ़ापे पर पाँच कविताएँ — जीवन के शिखर पर पहुँचना, फिर शरीर और मन के ढलाव को देखभाल से सँभालना, और पुराने रिश्तों के छूटते ही नए रिश्ते सींचना। एक ढलती धूप, जो अब भी बुलंद है। ढलती उम्र सिर्फ़ ह्रास नहीं — ये बरस भी भरपूर जिए जा सकते हैं।
सुनहरे बरस जियो
The Years You Earn
जीते रहो
The Years You Reclaim
सेहत बनाओ
The Body You Build
सोच बढ़ाओ
The Mind You Keep
रिश्ते सींचो
The Ties You Raise
क्रम से पढ़ें तो पाँचों ढलती उम्र का एक पूरा सफ़र बनाती हैं — कमाए बरस, फिर से पाए बरस, शरीर, मन और रिश्ते। हर एक अकेले भी, उस सुबह जब वह आपको मिले।