रिश्ते सींचो
रिश्ते सींचो
उन रिश्तों को अब वो प्यार दो, जिनकी तुमने नींव रखी थी,
जिन्हें तुमने पाला, जो दोस्त तुमने बरसों से सँभाले थे।
हाँ, धीरे-धीरे दायरा छोटा होता है, कुर्सियाँ ख़ाली होने लगती हैं,
फ़ोन की घंटी कम बजती है, और सन्नाटे की आवाज़ बढ़ने लगती है।
पर हाथ बढ़ाओगे, तो रिश्ते फिर से जवाब देंगे,
कॉल वापस आएँगी, और ख़ाली मेज़ पर नए चेहरे सजेंगे।
पुराना टूटता है तो नया बनाओ—यही तो कुदरत का नियम और रीत है,
गिरना और फिर उठ खड़ा होना ही इस जीवन की सबसे बड़ी जीत है!
सन्नाटे से मत डरो तुम, नए तारों से जोड़ो अपना तार,
दिल से रिश्ते पिरोते रहो, जब तक साँसों में है प्यार!
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ग़ज़ल · एकल पुरुष स्वर
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— Ramesh Jain